भारतीय माता-पिता के लिए बच्चे की पढ़ाई से ज़रूरी लक्ष्य कम ही होते हैं — और इतने महँगे और समय से बँधे लक्ष्य भी कम ही होते हैं। अच्छी बात यह है कि अगर आप जल्दी शुरुआत करें और सोच-समझकर योजना बनाएँ, तो भविष्य के बड़े खर्च को हर महीने के छोटे-छोटे कदमों में बाँटा जा सकता है।
मुख्य बातें
- आज की लागत का अनुमान लगाएँ, फिर उसमें शिक्षा महँगाई जोड़ें।
- पीछे की ओर हिसाब लगाकर जानें कि हर महीने कितना निवेश करना है।
- लक्ष्य पास आने के साथ धीरे-धीरे जोखिम कम करें।
- इस लक्ष्य को अपनी बाकी बचत से अलग रखें।
कदम 1: आज की लागत का अनुमान लगाएँ
तय करें कि आप किस तरह की पढ़ाई की योजना बना रहे हैं — इंजीनियरिंग या मेडिकल डिग्री, MBA या विदेश में पढ़ाई — और पता करें कि आज उसकी लागत कितनी है। इसमें ट्यूशन फ़ीस, हॉस्टल, किताबें, कोचिंग और आने-जाने का खर्च शामिल करें।
कदम 2: शिक्षा महँगाई जोड़ें
पढ़ाई का खर्च ऐतिहासिक रूप से सामान्य महँगाई से तेज़ी से बढ़ा है। भविष्य की लागत का अनुमान लगाने के लिए यह सूत्र इस्तेमाल करें:
भविष्य की लागत = आज की लागत × (1 + महँगाई दर)साल
उदाहरण: एक कोर्स जिसकी आज लागत ₹15 लाख है, 12 साल बाद, और शिक्षा महँगाई 8% सालाना मानी गई है:
₹15,00,000 × (1.08)12 ≈ ₹37.8 लाख
कदम 3: हर महीने का निवेश निकालें
अब अनुमान लगाएँ कि इस रकम तक पहुँचने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा। 12 साल तक 10% सालाना का उदाहरण-स्वरूप रिटर्न मानें, तो लगभग ₹13,550 की मासिक SIP से करीब ₹37.8 लाख जमा हो सकते हैं।
नीचे अपने आँकड़े डालकर देखें — रकम, साल और मानी गई रिटर्न दर बदलें:
सभी आँकड़े मानी गई दरों पर आधारित उदाहरण हैं। असल महँगाई और निवेश रिटर्न अलग होंगे और उनकी गारंटी नहीं है।
कदम 4: स्टेप-अप का विकल्प अपनाएँ
अगर आज ₹13,550 महीना ज़्यादा लगता है, तो जितना हो सके उतने से शुरू करें और आमदनी के साथ हर साल बढ़ाते जाएँ। ऊपर दिए कैलकुलेटर में वार्षिक स्टेप-अप स्लाइडर से देखें कि कम से शुरू करके हर साल 10% बढ़ाने से तस्वीर कैसे बदलती है।
कदम 5: लक्ष्य पास आने पर जोखिम घटाएँ
जब लक्ष्य कई साल दूर हो, तो आमतौर पर इक्विटी-आधारित फंड में ज़्यादा हिस्सा रखने पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि बाज़ार की गिरावट से उबरने का समय होता है। लेकिन आखिरी एक-दो साल में तेज़ गिरावट आपकी योजना को बुरी तरह बिगाड़ सकती है। इसलिए जैसे-जैसे लक्ष्य पास आए, पैसे को धीरे-धीरे कम जोखिम वाले विकल्पों में ले जाएँ:
| लक्ष्य में बचे साल | तरीका (उदाहरण) |
|---|---|
| 7 साल से ज़्यादा | बढ़त पर ध्यान, इक्विटी में ज़्यादा हिस्सा |
| 3 से 7 साल | संतुलित — कुछ मुनाफ़ा कम जोखिम वाले फंड में ले जाना शुरू करें |
| 3 साल से कम | पूँजी बचाने पर ध्यान — ज़्यादातर कम जोखिम वाले डेट फंड |
| आखिरी साल | फ़ीस के लिए ज़रूरी पैसा कम जोखिम वाले, लिक्विड विकल्पों में रखें |
हर साल बच्चे के जन्मदिन पर इस लक्ष्य की समीक्षा का रिमाइंडर कैलेंडर में लगा लें।
इन आम गलतियों से बचें
- देर से शुरू करना और फिर ज़्यादा जोखिम वाले निवेश से "कमी पूरी" करने की कोशिश करना।
- पढ़ाई के फंड को कार या छुट्टियों जैसे दूसरे खर्चों में लगा देना।
- महँगाई को कम आँकना — या कोचिंग और हॉस्टल जैसे खर्च भूल जाना।
- पर्याप्त जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा न होना। कमाने वाले माता-पिता को कुछ हो जाए, तब भी योजना पूरी होनी चाहिए।
- आखिरी साल तक पूरा पैसा इक्विटी में रखना।
साफ़ तस्वीर के साथ शुरुआत करें
तीन आँकड़े लिख लें: आज की लागत, बचे हुए साल और इस लक्ष्य के लिए अभी की बचत। सिर्फ़ इतना करने से आप ज़्यादातर माता-पिता से आगे हो जाते हैं। अगर ये आँकड़े निकालने में मदद चाहिए, तो संपर्क करें।
