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AMFI Registered Mutual Fund Distributor · ARN-354017 Mutual Fund investments are subject to market risks, read all scheme related documents carefully.
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म्यूचुअल फंड रिस्कोमीटर कैसे पढ़ें

भारत में हर म्यूचुअल फंड विज्ञापन, फ़ैक्टशीट और आवेदन फ़ॉर्म पर एक अर्धगोलाकार डायल होता है, जिसे रिस्कोमीटर कहते हैं। यह निवेशकों के लिए सबसे आसान और सबसे काम के साधनों में से एक है — फिर भी बहुत से लोग इसे कभी देखते ही नहीं। यहाँ जानिए इसे कैसे पढ़ें।

मुख्य बातें

  • रिस्कोमीटर छह स्तरों वाले पैमाने पर किसी योजना के पोर्टफ़ोलियो का जोखिम स्तर दिखाता है।
  • इसकी हर महीने समीक्षा होती है, इसलिए किसी योजना का जोखिम स्तर बदल सकता है।
  • रिस्कोमीटर को अपनी उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता और अपनी समय-सीमा से मिलाएँ।

रिस्कोमीटर क्या है?

रिस्कोमीटर SEBI द्वारा अनिवार्य किया गया एक विज़ुअल संकेतक है, जो बताता है कि किसी म्यूचुअल फंड योजना के निवेश कितने जोखिम भरे हैं। इसकी सुई छह में से किसी एक स्तर पर रुकती है:

स्तरआमतौर पर इसका मतलब
कम (Low)बहुत कम अवधि के, ऊँची गुणवत्ता वाले साधन; नुकसान की संभावना कम।
कम से मध्यम (Low to Moderate)ज़्यादातर डेट, सीमित ब्याज-दर और क्रेडिट जोखिम के साथ।
मध्यम (Moderate)ज़्यादा ब्याज-दर या क्रेडिट जोखिम वाला डेट, या कंज़र्वेटिव हाइब्रिड।
मध्यम रूप से उच्च (Moderately High)अच्छी-खासी इक्विटी वाले हाइब्रिड, या ज़्यादा जोखिम वाला डेट।
उच्च (High)मुख्य रूप से इक्विटी या उसके जैसा जोखिम।
बहुत उच्च (Very High)इक्विटी-आधारित योजनाएँ और सेक्टर, थीमैटिक या अंतरराष्ट्रीय फंड, जिनमें उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

ऊपर दिए विवरण समझने के लिए आसान बनाए गए हैं। किसी योजना का सटीक जोखिम स्तर AMC, SEBI की पद्धति से तय करती है।

जोखिम स्तर कैसे तय होता है?

AMC योजना के असल पोर्टफ़ोलियो को SEBI द्वारा तय मापदंडों पर परखती है — जैसे इक्विटी के लिए मार्केट कैपिटलाइज़ेशन और उतार-चढ़ाव, और डेट के लिए क्रेडिट गुणवत्ता, ब्याज-दर संवेदनशीलता और लिक्विडिटी। रिस्कोमीटर की हर महीने समीक्षा होती है, और बदलाव की सूचना यूनिटधारकों को दी जाती है।

डेट फंड के लिए पोटेंशियल रिस्क क्लास (PRC)

डेट फंड एक पोटेंशियल रिस्क क्लास मैट्रिक्स भी दिखाते हैं। यह एक ग्रिड है जो बताता है कि योजना अपने नियमों के तहत अधिकतम कितना ब्याज-दर जोखिम और क्रेडिट जोखिम ले सकती है। रिस्कोमीटर मौजूदा पोर्टफ़ोलियो दिखाता है, जबकि PRC बाहरी सीमाएँ दिखाता है।

रिस्कोमीटर का इस्तेमाल कैसे करें

  1. अपनी जोखिम प्रोफ़ाइल जानें। खुद से पूछें: अगर यह निवेश एक साल में 20% गिर जाए, तो क्या मैं निवेश बनाए रखूँगा/रखूँगी या घबरा जाऊँगा/जाऊँगी?
  2. इसे अपनी समय-सीमा से मिलाएँ। एक-दो साल में चाहिए पैसा आमतौर पर कम जोखिम वाली श्रेणियों के लिए बेहतर है। लंबी अवधि के लक्ष्यों में आमतौर पर ज़्यादा जोखिम वाली श्रेणियाँ शामिल की जा सकती हैं।
  3. पूरे पोर्टफ़ोलियो को देखें, सिर्फ़ एक योजना को नहीं। अलग-अलग जोखिम स्तरों का मिश्रण ठीक हो सकता है।
  4. समय-समय पर दोबारा जाँचें, क्योंकि किसी योजना का जोखिम स्तर बदल सकता है।

"बहुत उच्च" रिस्कोमीटर "बुरा" नहीं है और "कम" "अच्छा" नहीं है। ये बस अलग-अलग चीज़ें बताते हैं। सवाल यह है कि वह स्तर आपके लक्ष्य और स्वभाव के अनुकूल है या नहीं।

रिस्कोमीटर क्या नहीं बताता

  • यह रिटर्न का अनुमान नहीं लगाता।
  • यह नहीं बताता कि कोई योजना आपके लिए सही है या नहीं — यह केवल आप (और आपके लक्ष्य) तय कर सकते हैं।
  • "कम" जोखिम का मतलब "कोई" जोखिम नहीं, ऐसा नहीं है।

निवेश से पहले हमेशा रिस्कोमीटर को स्कीम इन्फ़ॉर्मेशन डॉक्यूमेंट के साथ पढ़ें। अगर किसी प्रोडक्ट को आपके सामने "सुरक्षित" या "गारंटीड" बताया जाए, लेकिन उसका रिस्कोमीटर कुछ और कहे, तो सवाल पूछें।

पता नहीं कि कौन-सा जोखिम स्तर आपके लिए ठीक है? आइए बात करें।

Mutual Fund investments are subject to market risks, read all scheme related documents carefully. This article is for investor education only and is not investment advice or a recommendation of any scheme. Examples and figures are illustrative. Love Rai is an AMFI Registered Mutual Fund Distributor (ARN-354017) and receives commission from AMCs on investments made through us. Full disclaimer.

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Written by

Love Rai

AMFI Registered Mutual Fund Distributor. I break down mutual funds, SIPs and goal-based investing into simple steps so you can invest with confidence. Have a question about this topic? I am happy to explain.

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